
भोपाल। राजधानी के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने और सीवेज प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम ने अमृत-2.0 योजना के तहत बड़ा कदम उठाया है।
शहर के 10 प्रमुख नालों पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे, जिन पर करीब 213.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल शहर की सीवेज उपचार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि बड़े तालाब, छोटे तालाब और बेतवा नदी जैसे प्रमुख जल स्रोतों को प्रदूषित होने से भी राहत मिलेगी।
वर्तमान में भोपाल से रोजाना करीब 360 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) सीवेज निकलता है, जिसमें से लगभग 240 एमएलडी बिना उपचार के ही जल स्रोतों में मिल रहा है। नए एसटीपी बनने के बाद 171 एमएलडी अतिरिक्त सीवेज का उपचार संभव होगा। इससे कुल उपचारित क्षमता 119 एमएलडी से बढ़कर करीब 290 एमएलडी तक पहुंच जाएगी।
नगर निगम फिलहाल 17 एसटीपी संचालित कर रहा है, जिनकी स्थापित क्षमता 204 एमएलडी है, लेकिन तकनीकी व अन्य कारणों से केवल 119.63 एमएलडी सीवेज का ही उपचार हो पा रहा है। नए 10 प्लांट जुड़ने के बाद शहर में कुल एसटीपी की संख्या 27 हो जाएगी और स्थापित क्षमता बढ़कर 375 एमएलडी तक पहुंच जाएगी।
इस परियोजना के तहत भानपुर क्षेत्र में 60 एमएलडी क्षमता का सबसे बड़ा एसटीपी स्थापित किया जाएगा, जो पातरा नाला के पानी को उपचारित करेगा। इसके अलावा बावड़िया कलां में 32 एमएलडी और खजूरी कलां में 20 एमएलडी क्षमता के प्लांट प्रस्तावित हैं। अन्य क्षेत्रों जैसे चार इमली, समरधा, माता मंदिर, बाणगंगा, अरहेड़ी, एकांत पार्क और कोटरा में भी छोटे-बड़े एसटीपी लगाए जाएंगे।
अभी शहर के 10 बड़े नालों का गंदा पानी सीधे बड़े तालाब, छोटे तालाब और बेतवा नदी में पहुंच रहा है। नए प्लांट शुरू होने के बाद यह पानी पहले उपचारित किया जाएगा और फिर जल स्रोतों में छोड़ा जाएगा। इससे जल गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
शहर में संचालित 17 एसटीपी की क्षमता भले ही 204 एमएलडी है, लेकिन वास्तविक उपचार इससे काफी कम हो रहा है। कई प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं, जिससे सीवेज प्रबंधन पर दबाव बना हुआ है।
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के अनुसार, अमृत-2.0 परियोजना के तहत लगाए जा रहे नए एसटीपी से शहर के सीवेज का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। उन्होंने कहा कि सभी प्लांट समय पर शुरू होने के बाद गंदे पानी को बिना उपचार के जल स्रोतों में जाने से रोका जा सकेगा।