12 से 22 दिनों में ओवरफ्लो का डर, ईरान के सामने एक और समस्या, तेल की भरती टंकियां बढ़ा रही हैं टेंशन
Updated on
29-04-2026 01:23 PM
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। उसे न सिर्फ ऑयल एक्सपोर्ट करने में मुश्किल हो रही है, बल्कि उसके स्टोरेज की जगह भी कम पड़ गई है। संकट के लंबा खिंचने और एक्सपोर्ट में रुकावट के साथ तेहरान के स्टोरेज टैंक तेजी से भरते जा रहे हैं। इससे देश को जल्द ही तेल उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ सकती है।
ब्लूमबर्ग ने एनर्जी रिसर्च फर्म केप्लर के हवाले से बताया, ईरान के पास अब सिर्फ 12 से 22 दिनों की खाली स्टोरेज क्षमता बची है।
अगर स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर जाते हैं तो ईरान को मई के मध्य तक कच्चे तेल का उत्पादन रोजाना 15 लाख बैरल तक कम करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
यह ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान का तेल उत्पादन पहले से ही दबाव में है। न्यूज़ आउटलेट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते गोल्डमैन सैक्श ने अनुमान लगाया था कि ईरान पहले ही रोजाना 25 लाख बैरल तक का उत्पादन रोक चुका है।
सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित खाड़ी के अन्य प्रमुख उत्पादकों ने भी सप्लाई में कटौती की है।
ईरान के लिए इसका मतलब
हालांकि स्थिति गंभीर है, लेकिन इसका वित्तीय असर तुरंत नहीं दिखेगा।
अप्रैल की शुरुआत से ही ईरान का तेल एक्सपोर्ट तेजी से गिरा है।
तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश दिया था।
केप्लर के अनुसार, ईरान की तेल की खेप घटकर लगभग 5,67,000 बैरल प्रतिदिन रह गई है। जबकि मार्च में यह औसतन 18.5 लाख बैरल प्रतिदिन थी। हालांकि, रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर को दिखने में शायद कुछ समय लगेगा।
असर दिखने में लगेंगे 3-4 हफ्ते
केप्लर ने बताया कि ईरान का कच्चा तेल आमतौर पर चीनी बंदरगाहों तक पहुंचने में लगभग दो महीने लेता है।
अक्सर यह प्रतिबंधों से बचने के लिए बनाए गए अप्रत्यक्ष रास्तों से भेजा जाता है।
इसके बाद पेमेंट क्लीयर होने में भी दो महीने और लगते हैं।
इसका मतलब है कि इसका पूरा वित्तीय असर शायद तीन से चार महीने बाद ही दिखेगा।
केप्लर ने यह भी कहा कि उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह पता चले कि टैंकर होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को सफलतापूर्वक चकमा देने में कामयाब रहे हैं। जब से नाकेबंदी शुरू हुई है, तब से टैंकरों में ईरान के कच्चे तेल की लोडिंग में लगभग 70% की भारी गिरावट आई है।
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